फरियाद की आवाज पर तुरंत संज्ञान, उपायुक्त ने दिए जांच के निर्देश

जमाबंदी जमीन पर कथित कब्जे की शिकायत लेकर पहुंचा फरियादी, आलोक कुमार ने गंभीरता से सुनी पूरी बात
जामताड़ा, 1 सितंबर।
किसी आम व्यक्ति के लिए उसकी जमीन सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि उसके परिवार की उम्मीद, मेहनत और भविष्य का सहारा होती है। ऐसे में जब कोई व्यक्ति अपनी ही जमीन पर कथित कब्जे की शिकायत लेकर प्रशासन के दरवाजे पहुंचता है, तो उसके लिए सबसे बड़ी उम्मीद होती है कि उसकी बात कोई गंभीरता से सुने।
मंगलवार को जामताड़ा समाहरणालय में कुछ ऐसा ही देखने को मिला। समाहरणालय पहुंचने के दौरान उपायुक्त सह जिला दण्डाधिकारी आलोक कुमार (भा.प्र.से.) की नजर एक फरियादी पर पड़ी। फरियादी ने अपनी समस्या उपायुक्त के सामने रखी और बताया कि नारायणपुर प्रखंड में उसकी जमाबंदी जमीन पर एक दबंग व्यक्ति द्वारा कथित रूप से जबरन कब्जा कर लिया गया है।
फरियादी ने अपनी बात रखते हुए मामले में न्याय और उचित कार्रवाई की गुहार लगाई। उपायुक्त आलोक कुमार ने उसकी पूरी बात गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुनी। इसके बाद उन्होंने मामले को लेकर तत्काल आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।
सिर्फ शिकायत नहीं सुनी, जांच के रास्ते भी खोले
उपायुक्त ने मामले की वास्तविक स्थिति की जांच कराने तथा जांच के बाद विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए अनुमंडल पदाधिकारी को निर्देश दिया।
प्रशासन की ओर से उठाया गया यह कदम उस फरियादी के लिए निश्चित रूप से राहत और उम्मीद का संदेश है, जो अपनी जमीन से जुड़ी समस्या को लेकर न्याय की आस में प्रशासन तक पहुंचा था।
आम आदमी की समस्या ही प्रशासन की प्राथमिकता
उपायुक्त आलोक कुमार ने स्पष्ट कहा कि आमजनों की शिकायतों का निष्पक्ष और समयबद्ध निराकरण जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि लोगों की समस्याओं को संवेदनशीलता से सुना जाए और नियमानुसार त्वरित एवं न्यायोचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
यह पहल प्रशासन और आम जनता के बीच भरोसे की कड़ी को मजबूत करने वाली है। क्योंकि जब किसी जरूरतमंद की बात सुनी जाती है और उसकी शिकायत पर कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ता है, तो उसके मन में व्यवस्था के प्रति विश्वास और मजबूत होता है।
फिलहाल इस मामले में जांच के बाद वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है और आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर नजर बनी रहेगी।

“प्रशासन का दरवाजा हर उस व्यक्ति के लिए खुला है, जिसे न्याय की उम्मीद है—जरूरत है तो बस अपनी बात सही मंच तक पहुंचाने की।”

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