फतेहपुर / जामताड़ा
ग्राम सक्षम परियोजना के तहत संवाद संस्था की ओर से सिमलाडंगाल पंचायत सचिवालय में महिला किसानों के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में सिमलाडंगाल एवं जमजोरी पंचायत की महिला किसानों ने भाग लिया। प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को कृषि, पशुपालन एवं समेकित खेती-बाड़ी के माध्यम से उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर आय के विभिन्न स्रोत विकसित करने की जानकारी देना रहा।
प्रशिक्षण के दौरान संवाद संस्था के साथी घनश्याम ने समेकित खेती-बाड़ी की अवधारणा को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि किसान अपने खेत, तालाब और उपलब्ध जमीन का एक-दूसरे से जुड़ी गतिविधियों के रूप में उपयोग कर सकते हैं। इससे एक ही संसाधन से कई तरह के उत्पादन और आय के अवसर तैयार किए जा सकते हैं।
तालाब के साथ सब्जी खेती और जामुन के पेड़ लगाने पर जोर
घनश्याम ने बताया कि समेकित खेती में तालाब की मेड़ पर सब्जियों की खेती की जा सकती है। इसके अलावा तालाब की मेड़ पर जामुन के पेड़ जैसे फलदार पौधे भी लगाए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि तालाब के आसपास पेड़-पौधे और हरियाली रहने से पर्यावरण को भी लाभ मिलता है तथा तालाब के पानी और उसमें पलने वाली मछलियों को बेहतर वातावरण मिल सकता है।
उन्होंने किसानों को बताया कि तालाब में मछली पालन के साथ उसके आसपास अन्य गतिविधियों को जोड़कर किसान अपने संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकते हैं। तालाब की मेड़ पर सब्जी की खेती और जामुन के पेड़ लगाने से एक ही स्थान से सब्जी, फल और मछली उत्पादन का लाभ लिया जा सकता है।
मछली पालन के साथ मुर्गी पालन
प्रशिक्षण में कुक्कुट पालन यानी मुर्गी पालन को भी समेकित खेती का हिस्सा बनाने की जानकारी दी गई। किसानों को बताया गया कि तालाब के आसपास मुर्गी पालन को मछली पालन के साथ जोड़ा जा सकता है। इस तरह कृषि, मछली पालन और मुर्गी पालन जैसी गतिविधियों को एक साथ संचालित कर किसान अपनी आय के स्रोत बढ़ा सकते हैं।
घनश्याम ने कहा कि समेकित खेती का उद्देश्य उपलब्ध जमीन, पानी और अन्य संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना है, ताकि किसान केवल एक फसल पर निर्भर न रहें। अलग-अलग गतिविधियों को आपस में जोड़कर खेती को अधिक उपयोगी और आजीविका का मजबूत आधार बनाया जा सकता है।
इस दौरान किसानों के बीच समेकित खेती-बाड़ी से संबंधित पुस्तिका (बुकलेट) भी वितरित की गई। पुस्तिका के माध्यम से किसान प्रशिक्षण में मिली जानकारी को आगे भी पढ़कर अपने खेतों एवं उपलब्ध संसाधनों के अनुसार उसका उपयोग कर सकेंगे।
कार्यक्रम में मुखिया मिथिला मुर्मू भी किसान के रूप में शामिल हुईं। इसके अलावा शांति देवी, चुड़की हांसदा, चूड़ामणि मुर्मू, मायोनोमती टुडू, लक्ष्मी मुर्मू सहित जमजोरी एवं सिमलाडंगाल पंचायत की अन्य महिला किसान मौजूद रहीं।
प्रशिक्षण के आयोजन एवं संचालन में संवाद संस्था के साथी घनश्याम, इमरान, रजाउल, सुशीला सहित अन्य सहयोगियों ने सहयोग किया। प्रशिक्षण के दौरान महिला किसानों ने कृषि एवं पशुपालन से जुड़ी अपनी समस्याएं और अनुभव भी साझा किए तथा समेकित खेती-बाड़ी को लेकर आवश्यक जानकारी प्राप्त की।
आयोजकों ने बताया कि ग्राम सक्षम परियोजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों, विशेषकर महिला किसानों को विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़ने और उनकी क्षमता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। समेकित खेती-बाड़ी के माध्यम से किसानों को उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर कृषि, सब्जी उत्पादन, बागवानी, मछली पालन और मुर्गी पालन जैसी गतिविधियों को जोड़कर आय के कई स्रोत विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।









