RCD के टेंडर में बड़ा खेल? 4, 12 और 14 प्रपत्र बिके, तीनों ग्रुप में सिर्फ 2-2 टेंडर!

भाजपा महामंत्री कमलेश मंडल ने जताई सिंडिकेट की आशंका, डीसी से टेंडर रोककर निष्पक्ष जांच की मांग

जामताड़ा। पथ निर्माण विभाग (RCD) की निविदा आमंत्रण सूचना संख्या 3/2026-27 अब सवालों के घेरे में आ गई है। टेंडर प्रक्रिया में निविदा प्रपत्रों की बिक्री और जमा हुई निविदाओं के आंकड़ों को लेकर भाजपा जिला महामंत्री कमलेश मंडल ने गंभीर अनियमितता का आरोप लगाया है। उन्होंने पूरे मामले को लेकर उपायुक्त को ज्ञापन सौंपते हुए निविदा प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

कमलेश मंडल के अनुसार ग्रुप संख्या-1 में चार निविदा प्रपत्र बिके, लेकिन जमा सिर्फ दो हुए। ग्रुप संख्या-3 में 12 प्रपत्र बिके, लेकिन वहां भी केवल दो निविदाएं जमा हुईं। वहीं ग्रुप संख्या-4 में सबसे अधिक 14 निविदा प्रपत्र बिकने के बावजूद सिर्फ दो निविदाएं ही प्राप्त हुईं। यानी तीनों ग्रुप में प्रपत्रों की बिक्री का आंकड़ा और अंतिम रूप से प्राप्त निविदाओं की संख्या के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है।

भाजपा महामंत्री ने इसी अंतर को आधार बनाकर टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि जब किसी टेंडर के लिए कई संवेदक निविदा प्रपत्र खरीदते हैं तो स्वाभाविक रूप से प्रतिस्पर्धा की स्थिति बनती है। लेकिन यहां अलग-अलग ग्रुप में कई प्रपत्र बिकने के बावजूद अंतिम चरण में सिर्फ दो-दो निविदाओं का रह जाना गंभीर जांच का विषय है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह स्थिति कथित सिंडिकेट या पूलिंग की ओर इशारा करती है। आरोप है कि विभागीय अधिकारियों और कुछ चुनिंदा संवेदकों के बीच कथित मिलीभगत के कारण अन्य संवेदकों को निविदा प्रक्रिया से दूर रखने का प्रयास किया गया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और इसकी वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

कमलेश मंडल ने कहा कि यदि निविदा प्रक्रिया में किसी प्रकार की मिलीभगत या प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने की कोशिश हुई है तो इसका सीधा असर सरकारी राजस्व और विकास कार्यों पर पड़ सकता है। उनका आरोप है कि चुनिंदा संवेदकों को लाभ पहुंचाने की स्थिति में सरकार को आर्थिक नुकसान हो सकता है और भविष्य में कार्य की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।

सीसीटीवी फुटेज से खुलेगा राज?

भाजपा महामंत्री ने जांच के दायरे में टेंडर प्रक्रिया के दिन की सीसीटीवी फुटेज को भी शामिल करने की मांग की है। उनका कहना है कि फुटेज से यह पता लगाया जा सकता है कि निविदा जमा करने के दिन विभागीय कार्यालय में कितने संवेदक पहुंचे थे और वास्तव में कितने लोगों ने टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा लिया। इसके अलावा निविदा प्रपत्र खरीदने वाले संवेदकों और बाद में टेंडर जमा नहीं करने वालों से भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है।

उन्होंने उपायुक्त से मांग की है कि निविदा आमंत्रण सूचना संख्या 3/2026-27 की पूरी प्रक्रिया की जांच होने तक टेंडर को आगे नहीं बढ़ाया जाए। साथ ही निविदा से जुड़े सभी दस्तावेज, बिक्री रजिस्टर, निविदा बॉक्स से संबंधित रिकॉर्ड, जमा निविदाओं का विवरण और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखे जाएं, ताकि जांच के दौरान किसी भी तथ्य से छेड़छाड़ की आशंका न रहे।

कमलेश मंडल ने कहा कि सरकारी विकास कार्यों में टेंडर प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होना जरूरी है। यदि जांच में किसी अधिकारी या संवेदक की भूमिका सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने पूरे मामले को जनहित से जुड़ा बताते हुए उपायुक्त से त्वरित और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

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