भंडारबेड़ा सिद्धू-कान्हू चौक से मधुबन कुरुली तक सड़क निर्माण अधूरा, ग्रामीणों ने ठेकेदार व विभागीय निगरानी पर उठाए सवाल

दो साल बाद भी अधूरी सड़क, बारिश में तालाब बन जाता है रास्ता

नाला। जामताड़ा जिले के नाला प्रखंड में भंडारबेड़ा सिद्धू-कान्हू चौक से मधुबन कुरुली तक सड़क निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क का शिलान्यास करीब दो वर्ष पहले हुआ था, लेकिन निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी सड़क का निर्माण पूरी तरह पूरा नहीं हो सका है। सड़क के कुछ हिस्सों में पिचिंग का काम किया गया है, जबकि कई स्थानों पर पीसीसी निर्माण अब भी अधूरा बताया जा रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, सड़क निर्माण की धीमी गति के कारण उन्हें लंबे समय से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के दिनों में समस्या और गंभीर हो जाती है। देवली कुंडागल गांव के अंदर सड़क पर जलजमाव के कारण रास्ता तालाब जैसा दिखाई देने लगता है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क पर जमा पानी कई बार आसपास के घरों तक पहुंच जाता है।

सड़क बनी, लेकिन जल निकासी की समस्या जस की तस

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से बारिश का पानी सड़क पर जमा हो जाता है। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि सड़क निर्माण के साथ पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं की गई तो बरसात में लोगों को जलजमाव से कैसे राहत मिलेगी।

ग्रामीणों ने सड़क के किनारे किए गए कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाया है। उनका आरोप है कि जिन हिस्सों में पिचिंग का काम किया गया है, वहां सड़क के किनारे मिट्टी तो डाली गई, लेकिन समतल नहीं किया गया। इससे सड़क के किनारे ऊंच-नीच की स्थिति बनी हुई है।

कभी काम शुरू, कभी बंद होने का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण कार्य पहले से ही विवादों में रहा है। उनके अनुसार, निर्माण कार्य कई बार शुरू हुआ और फिर बंद हो गया। काम की यही धीमी रफ्तार अब ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बन गई है।

स्थानीय लोगों ने निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सड़क निर्माण में तेजी लाने के साथ-साथ गुणवत्ता की भी जांच होनी चाहिए। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा काम में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित ठेकेदार का पक्ष सामने नहीं आया है।

विभागीय अधिकारियों से जांच की मांग

ग्रामीणों ने संबंधित विभाग के अधिकारियों से सड़क का स्थल निरीक्षण कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि अधिकारी मौके पर पहुंचकर निर्माण की प्रगति, सड़क की गुणवत्ता, पीसीसी कार्य, पिचिंग और जल निकासी व्यवस्था की जांच करें।

ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि यदि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए और अधूरे कार्य को जल्द पूरा कराया जाए।

फिलहाल सड़क निर्माण को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बनी हुई है। करीब दो वर्ष बाद भी सड़क के पूरी तरह तैयार नहीं होने और बारिश में जलजमाव की समस्या को लेकर अब लोगों की नजर संबंधित विभाग की कार्रवाई पर टिकी है।

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